प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध

श्री गुरु और SRM टीम द्वारा

Get earliest and exclusive updates! Subscribe now.

Related

भगवद् गीता नहीं, भगवद् गीत

दस्तूर-ए-प्रियतम है कुछ ऐसाकि इनकी चौखट पर मिटता है सब कुछ..पराया या अपना..!दूर से देखो तो लगती हैं दीवारें ऊँची से ऊँची,पर पास आ...

चाहत यही तो!

दिल चाहता है हवाओं के साथ प्रियतम तक बह चलें दिल चाहता है पानियों सा हो कर उनके अनहद सागर में खो चलें दिल चाहता है लपटों सा उठ कर...

प्रियतम का पहरा

प्रेम के इस मेले में हर तरफ़ है सब कुछ भरा हुआ,मौन भी है ऐसा कि हर शब्द उसी में ठहरा हुआ!गीत बजते हैं अनहद धुन की तरह, कुछ इस कदरबजाने...