वह कौन सा ढाई अक्षर का शब्द है जो किसी का दिन बना सकता है, या उसे पूरी तरह खराब कर सकता है?
जो किसी अजनबी को निराशा के गर्त से निकाल सकता है, या किसी मित्र को दुखों के कुएं में धकेल सकता है?
जो किसी गहरे घाव को भर सकता है, या उस पर नमक छिड़क सकता है?
जो विनम्रता से दिलों को जीत सकता है, या अहंकार से उन्हें तोड़ सकता है?
जो दो व्यक्तियों के बीच एक सेतु का निर्माण कर सकता है, या एक अभेद्य दीवार खड़ी कर सकता है?
वह ढाई अक्षर का शब्द है: ‘शब्द’। जी हाँ, यहाँ बात किसी एक विशेष चमत्कारी शब्द की नहीं, बल्कि उन सभी शब्दों की सामूहिक शक्ति की है जिन्हें आज हम लिखने, बोलने या सोचने के लिए चुनेंगे।
यह शक्ति उनकी पारदर्शिता (transparency) से आती है। आप अपने शब्दों के पीछे छिप नहीं सकते, क्योंकि वे आपके बारे में सब कुछ बयां कर देते हैं – 1 प्रतिशत अपने अर्थ के माध्यम से, और शेष 99 प्रतिशत अपने भीतर समेटी हुई ऊर्जा के माध्यम से। जब ये दोनों एक-दूसरे से संबद्ध नहीं होते, तो शब्दों की ऊर्जा उनके अर्थ को पूरी तरह से निरर्थक बना देती है।
इसलिए अपने शब्दों को समझदारी से चुनें। और अनुकंपा से भी।
क्योंकि उनसे जो चोट पहुँचती है, वह किसी भी शारीरिक घाव से कहीं अधिक गहरी होती है। और उनसे जो ढाई अक्षर का ‘प्रेम’ फैलता है, वह आपके जीवनकाल से कहीं अधिक समय तक जीवित रहता है।
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