एक बार की बात है। एक कृष्ण-भक्त ने स्वप्न देखा, जिसमें श्री कृष्ण ने उसे वचन दिया – “मैं शीघ्र ही तुम्हारे घर माखन खाने आने वाला हूँ।”
जब वह भक्त सुबह उठा तो उसका मन नाच उठा। दिये, फल-फूल इत्यादि इकट्ठा कर वह पूरा दिन घर-आँगन सजाने में लगा रहा।
रात्रि को थक कर सोने गया तो फिर एक स्वप्न आया। इस बार स्वप्न में श्री कृष्ण नहीं, गोपियों का आना हुआ।
एक गोपी ने पूछा – “यह सब सजावट उनके लिए है या तुम्हारे लिए?”
भक्त ने कहा – “सारी सजावट पूर्ण रूप से उनके लिए ही है!”
गोपी ने कहा – “फिर सजावट वैसी क्यों नहीं करते, जैसी उन्हें पसंद है?”
भक्त ने विनती की – “कृपया मुझे बतायें की मेरे ईश्वर को कैसी सजावट पसंद है? मैं उनके आगमन के लिए इस घर को अत्यंत सुंदर बनाना चाहता हूँ!”
गोपी ने मुस्कुराते हुए कहा –
“कृष्ण तो तुम्हारे हृदय रूपी घर में आयेंगे, भक्ति रूपी माखन खाएँगे!
तो सजाओ, सँवारो, सुंदर बनाओ, परंतु…
अपने मन को, शुद्ध भावों से,
अपने हृदय को, उनके स्मरण से,
और अपनी आत्मा को, गुण-रूपी पुष्पों के हार से..!”
जन्मों-जन्म का रहस्य उघड़ गया, और भक्त की नींद खुली। अमृत वेला के पावन पलों में वह ईश्वर के आगमन की तैयारी में तन्मय हो गया…
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