
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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“रचना (Creation) एक भ्रमित करने वाला शब्द है; इस दुनिया में कोई भी नई रचना नहीं होती, सब कुछ केवल अभिव्यक्त (manifest) होता है।”
जीवन की एक विचित्र विडंबना यह है कि हम अक्सर वस्तुओं को उनकी अनुपस्थिति में ही पहचानते हैं। भोजन में नमक, घर में बिजली, शरीर का...
कृपा उसी क्षण साकार हो जाती है जब प्रियतम (ईश्वर) पौराणिक कथाओं की परछाइयों से निकलकर साधक की धड़कनों में बस जाते हैं। सद्गुरु की...
सर्वोचित्त कथन!