
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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सोचो, अगर इंसान ही न रहे, क्या फिर भी उसे देश कहोगे? सोचो, अगर कोई अर्थ ही न रहे, क्या फिर भी उसे शब्दकोश कहोगे?सोचो, अगर तपन ही न...
अस्तित्व का हृदय सृजन है, सृजन का हृदय संयोजन है, और संयोजन का हृदय स्पंदित होता है एक तड़प से।और इस हृदय का हृदय?दूरी।जिसमें...
अपनी सुबह की शुरुआत और रातों का अंत हर बोझ से मुक्त होकर करें।आपने इस ब्रह्मांड का बोझ अपने कंधों पर नहीं उठाया हुआ है।वास्तविकता...
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