मन विचारों से भरा रहता है — शुभ हो या अशुभ।
बुद्धि निर्णयों से सजी हुई रहती है — आग्रह हो या अंधविश्वास।
लेकिन हृदय की माँग कुछ और ही है!
न शुभ चाहिए, न अशुभ; न आग्रह में रस है, न अंधविश्वास का आग्रह!
हृदय को तो बस चाहत होती है ऐसे प्रेमी की, जिस में बसते हों हमारे श्वास!
ये श्वास में बसते-बसते कब हमारे विश्वास में उतर आते हैं पता भी नहीं चलता, और यह विश्वास कब हमारे जीवन की डोर को परम के एक छोर से बांध देता है, पता भी नहीं चलता!
मन और बुद्धि तो बंद कमरों जैसे हैं जिन में बंद हो कर हम पृथ्वी से तो संबंध बना लेते हैं लेकिन अनंत आकाश से संबंध विच्छेद हो जाता है। आकाश मौजूद है हर तरफ़ लेकिन शुभ–अशुभ की दीवारों में और आग्रह–अंधविश्वास की छतों के नीचे हमें तो अनंत आकाश के व्यापक विस्तार की खबर ही नहीं हो पाती है!
ऐसे में चाहिये कोई प्रेमी हृदय का आगमन —
ऐसे सद्गुरु का जो तुम्हारी दीवारें तोड़ता है, छतों को गिराता भी है परंतु फिर भी तुम उसके प्रेम–पाश से छूटना नहीं चाहते हो..!
ऐसे प्रेम में डूबे अस्तित्व का जो सतत तुम्हें तोड़ता जाए परंतु फिर भी तुम्हारा हृदय उसे छोड़ न पाये..!
ऐसे शून्य हुए संत का जो सतत तुम्हारे अहंकार से लड़ रहा हो पर तुम चाह कर भी उससे लड़ने के लिए ख़ुद को तैयार न कर सको..!
जब ऐसे किसी आकाश से तुम्हें प्रेम हो जाए तो समझना कि परमात्मा तुम्हारे हृदय के आँगन में उतर रहे हैं। जब मन-बुद्धि की दीवारें और छत टूट जाएँ तो जो बचता है वही हृदय है। इस हृदय के आँगन में ही प्रेम का आकाश उतर आता है और आनंद की मूसलाधार बरसात होती है — यही परमात्मा की पहली खबर है और यही परमात्मा में लीन हो जाने का हमारा अंतिम सफ़र है!
प्रेम वो सीढ़ी है, जहां से अनन्त को छु सकते है! प्रेम और परमात्मा एक ही सत्य के दो नाम हैं, जिन प्रेम कीयो तिन ही प्रभु पायो। जीवन में गुरु की अनंत कृपा। अहो भाव!! श्री गुरु की असीम कृपा व आशीर्वाद स्वरूप प्रेम, आनंद परमानंद की अनुभूति भीतर!! भक्ति श्रद्धा, समर्पण, सेवा, संयम के लिए हम सदैव तत्पर है। कृतज्ञता, आभार व वंदन श्री गुरु 👏🌹
अहो उपकार श्री गुरु ❣️
हमारा गुरु के प्रति आकर्षण अन्य शक्तियो की अपेक्षा, संसार की सबसे प्रबल शक्ति है क्योंकि एक गुरु के प्रति श्रदा और प्रेम ही वे भाव है जो हमे रूपांतरित करने और भीतर रहे ईश्वरत्व को जागृत करने मे हमारी सहायता करते हैं। धन्य सद्गुरु
प्रेम के इस विस्तार में सद्गुरु हमारी और बाहे फैलाये हैं, ये हम अज्ञानी समझ ही नहीं पाते और शुभ-अशुभ के दायरे बना कर उलझ जाते हैं! धन्यवाद सद्गुरु, इन दायरों को तोड़ने की हिम्मत देने के लिए, प्रेम सागर में अहंकार की मिट्टी धोने के लिए🙏🙏