
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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जब वर्तमान क्षण के सिवाय आप किसी अन्य समय या स्थान में न जाना चाहो।जब वर्तमान कर्म के सिवाय आप कुछ और न करना चाहो।जब इच्छाओं और...
सोचो, अगर इंसान ही न रहे, क्या फिर भी उसे देश कहोगे? सोचो, अगर कोई अर्थ ही न रहे, क्या फिर भी उसे शब्दकोश कहोगे?सोचो, अगर तपन ही न...
अस्तित्व का हृदय सृजन है, सृजन का हृदय संयोजन है, और संयोजन का हृदय स्पंदित होता है एक तड़प से।और इस हृदय का हृदय?दूरी।जिसमें...
प्रेम कोई वासना नहीं है, प्रेम तो बस प्रेम है, प्रेम न तेरा है न मेरा है……प्रेम वो विशाल सागर है जिसमें सब छोटे बड़े मिल कर विशाल हो जाते है …
प्रेम कोई वासना नहीं है, प्रेम तो बस प्रेम है, प्रेम न तेरा है न मेरा है……प्रेम वो विशाल सागर है जिसमें सब छोटे बड़े मिल कर विशाल हो जाते है …
इतने कम शब्दों में इतना गहरा बोध!
प्रेम वो डोर है
जिसके दोनो छोर
एक ही है बस एक ही है…….❤️❤️