एक बार की बात है, मुक्ति के प्रवेश द्वार पर एक विचित्र घटना घटी। एक मनुष्य उस दिव्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा, इस दावे के साथ कि उसने अपने सभी कर्मों के ऋण चुका दिए हैं। परंतु प्रवेश द्वार ज्यों का त्यों बंद रहा।
द्वारपाल ने उस मनुष्य की कर्म फाइलों की गहन समीक्षा और कई जटिल गणनाओं के बाद यह निर्धारित किया कि एक अंतिम ऋण अभी भी चुकाया नहीं गया है।
द्वारपाल ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हें किसी एक व्यक्ति को क्षमा करना है, उसके बाद ही तुम यहाँ प्रवेश कर पाओगे।”
उस मनुष्य ने उत्तर दिया, “मैं सच कहता हूँ कि मैंने हर उस व्यक्ति, वस्तु और परिस्थिति को क्षमा कर दिया है जिसके प्रति मेरे मन में किसी भी जन्म में अल्प मात्र भी शिकायत रही हो।”
द्वारपाल ने दोहराया, “तुम किसी व्यक्ति या वस्तु को अवश्य भूल रहे हो, ब्रह्मांडीय गणना गलत नहीं हो सकती!” फिर उसने एक थैले से एक छोटा सा दर्पण निकाला और कहा, “यह अस्तित्व का दर्पण है, तुम इसका उपयोग अपने सभी जन्मों को फिर से देखने के लिए कर सकते हो ताकि उस व्यक्ति या वस्तु को पहचान पाओ।”
अपने सभी जन्मों को घंटों तक देखने के बाद, वह मनुष्य उत्साह से भरा हुआ दौड़ता हुआ वापस लौटा और बोला, “मुझे वह आखिरी व्यक्ति मिल गया है जिसे मुझे क्षमा करना है! वह स्वयं मैं हूँ! मैं अपने सभी पापों के लिए स्वयं को कभी क्षमा नहीं कर पाया। अब मैं अपने हृदय की गहनतम गहराई से खुद को क्षमा करता हूँ!”
और अपराध भाव के अंतिम ऋण से मुक्त हुई आत्मा के लिए मुक्ति का भव्य द्वार उसी क्षण खुल गया…
हम हर रोज़ रात को क्षमापना पाठ करते समय खुद को भी माफ़ करने का निर्णय करते है, जिसे प्रभु आप सफल करें 🙏🏼
मेरे विचार में सबसे पहले अपनी गलती को पहचान कर फिर से कोई बुरा कर्म न करें हम यह प्रतिज्ञा लेकर अपनी आपको क्षमा करें तभी असली मुक्ति के द्वार में प्रवेश कर सकते हैं
सटीक बोध।
जय कृपालु 🙏मै भी आज प्रियवर की साक्षी मे खुद को क्षमा करती हूँ, मिच्छामी दुक्कडम🙏🙏🙏शुक्रिया सोल स्पार्क आपका💜💜💜
निःशब्द 🙏❤️ प्रभु
Thank you so much Sri Guru 💕
समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करने के लिए 💐