प्रेम की संपदा किसी जागृत व्यक्ति में उतरती है। किसी बुद्ध, कृष्ण, महावीर या मीरा में प्रेम की असीम संपदा उघड़ती है। जिस ने स्वयं में प्रेम के अनंत सागर को पीया है वही दूसरों को प्रेम कर सकता है लेकिन जो स्वयं अभी प्रेम के इस पवित्र रस से अपरिचित है उसे तो प्रेम एक तुच्छ लौकिक भाव ही लगेगा! स्मरण रखना — प्रेम को पहचानना, प्रेम में डूबना और प्रेम हो जाना — यही बुद्धत्व की संपूर्ण यात्रा है।
प्रेम की उपलब्धि अर्थात् जागरण की समाधि और यही प्रेम समाधि है!
इस प्रेम समाधि को पहचानने के लिये शास्त्र-ज्ञान का जुनून नहीं, शास्ता के स्मरण का सुकून चाहिए!
इस प्रेम समाधि में डूबने के लिए श्वास की सजगता नहीं, धड़कन की ऊष्म-थिरकन चाहिए!
इस प्रेम-समाधि में जीने के लिए जीवन की ऊर्जा नहीं, जीवंतता से भरा जिगर चाहिए!
इस प्रेम-समाधि में खोने के लिए अपनी मौजूदगी नहीं, ईश्वरीय गुणों का शिखर चाहिए!
प्रेम जागरण का वह शिखर है जहाँ से अब कहीं पहुँचने का जुनून मौजूद ही नहीं है लेकिन हम सदा मंज़िल पर खड़े हैं — ऐसा तृप्त सा एहसास सदा उपस्थित है। प्रेम में हृदय की धड़कन ब्रह्माण्डीय जीवंतता से ऐसी समरस हो जाती है कि ईश्वरीय प्रकृति अपने कार्य उस हृदय को सौंपती चली जाती है..! ऐसे अलौकिक हृदय को ही हम सद्गुरु कहते हैं। ऐसे हृदय में बुद्ध का अचल बुद्धत्व है और कृष्ण की अगम तटस्थता है; महावीर का ठहरा हुआ समत्व है और मीरा का नाचता हुआ प्रेम-समर्पण भी है! यह प्रेम जुनून नहीं लेकिन जागरण की वह ऊँचाई है जहाँ पहुँच कर बस सुकून है, हृदय के कालातीत क़ानून है और ब्रह्माण्ड की अविरल चलती यह मीठी सी धुन है!
ऐसी प्रेम समाधि में आप सभी का स्वागत है! इस में प्रवेश के नियम बातों से बताये नहीं जाते लेकिन हृदय से सुने अवश्य जाते हैं! यहाँ अनेकों विरोधाभास मौजूद हैं लेकिन यह सभी उस परम ‘एक्य’ को समझाने के ही प्रयास हैं!
Very True
ऐसे प्रेम भरे निमंत्रण को बारंबार नमन। आपके दिव्य प्रकाश में सहज तृप्ति का अहसास है।🙏🙏🙏
मैं भी प्रभु आपके प्रेम समाधि में डूबा हुआ हूं, श्री गुरु आप हमारे प्रति अपना पूरा प्यार बरसा रहे हों, वंदन, नमन
बस प्रभु जी ऐसी निगाह आप ही कृपा करते हैं अपने संतों पर ज्ञान से और ध्यान से 🧘
कि दे निगाह ऐसी कि ऐसी रसाई दे.
देखों अगर आईना तो तू दिखाई दे.
यूँ तो इस दरिया में कतरे हैं सब.
कतरा वही है, जिसमें दरिया दिखाई दे.
🧘
मेरे प्रियतम
मुझे भी इस प्रेम मे खो कर प्रेम हो जाना है ♥️
Aho upkar… Aho upkar… May the words of this blog come true for my soul! Sri Guru, krupa kijiye
पायो जी मैंने प्रेम रतन धन पायो..शुक्रिया।
Thankyou so much Shri guru for giving everything 🙏🙏🙏
बहुत सुन्दर भाव-अभिव्यक्ति और परम सत्य 🙏🙏
अनुभूति के बाद का अनुभव गुरु कृपा से ही संभव है🙏
अहो उपकार श्री गुरुजी!
बारम्बार प्रणाम प्रभु उस दिव्यता को जो दिव्यता हमे भी पावन बना रही है और उस दिव्यता के अनुभव सागर में ले जा रही हैं।