‘साहस’ और ‘शक्ति’ दो ऐसे शब्द हैं जिन्हें अक्सर एक ही अर्थ में प्रयोग कर लिया जाता है। पर क्या ये सचमुच पर्यायवाची हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं।
शक्ति ऊर्जा है, और साहस परीक्षाओं और चुनौतियों के सामने उस ऊर्जा का उपयोग करने की तत्परता है। हमें पहले शक्ति चाहिए जो साहस बनकर प्रकट होती है। इसके विपरीत करना – शक्ति के बिना साहस दिखाना – हमें निश्चित असफलता की ओर ले जाता है।
आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए साहस की अनिवार्यता होती है। अपनी सीमित मान्यताओं को छोड़ने का साहस, एक ऐसा जीवन जीने का साहस जो हमारे मित्रों या परिवारजनों से भिन्न हो सकता है, सीमित बुद्धि से उत्पन्न इच्छाओं का त्याग करने का साहस, ईश्वरीय सत्ता के अनंत ज्ञान के अज्ञात क्षेत्र से आने वाले दिव्य आदेश को अपनाने का साहस। यात्रा के आरंभ में इस साहस (तत्परता) के कई स्रोत हो सकते हैं – जिज्ञासा, दुखों के दुष्चक्र को तोड़ने की अभिलाषा, या संभवतः परम से मिलन की तड़प। परंतु यदि हम इस साहस का उपयोग शक्ति के कुण्ड को भरे बिना करते हैं, तो हम अधिक दूर नहीं जा सकते।
तो प्रश्न यह है कि शक्ति के कुण्ड को पुन:पुनः कैसे भरें? शक्ति का सबसे प्रबल स्रोत है एक दिव्य अहसास – यदि आपको इस मार्ग पर चलने के लिए चुना गया है, तो यह केवल इसलिए है क्योंकि किसी शुद्ध-बुद्ध चेतना ने आपसे अनन्य प्रेम किया है।
इस अहसास को अपने भीतर गहराई से उतरने दें, और अपने हृदय में व्यापक होते वेदन को महसूस करें। इस वेदन से ही आपकी शक्ति का कुण्ड भर जाएगा। अब आप आज के दिन का सामना करने के लिए तैयार हैं, साहस के साथ!
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