यदि आपको ईश्वर से एक ऐसी प्रार्थना करने का वरदान मिले, जिसका सफल होना निश्चित है, तो वह प्रार्थना क्या होगी?
आइए, हम तीन सरल और तर्कसंगत चरणों में सर्वोत्तम प्रार्थना खोजते हैं –
पहला चरण
पहला चरण इस स्वीकृति के साथ आरंभ होता है कि हम प्रार्थना में जो भी मांगते हैं, वो हमारी सीमित बुद्धि से आता है। ऐसी बुद्धि जिसे हमारे भविष्य को नियंत्रित करने वाले असंख्य कर्म के बंधनो के बारे में अत्यंत अल्प ज्ञान है। अतः हम जिस भी परिस्थिति में हों, केवल एक अनंत ईश्वरीय सत्ता ही है जो हमें हमारे सर्वोत्तम भविष्य की ओर मार्गदर्शन करा सकती है। यह हमें सबसे श्रेष्ठ प्रार्थना का आधार देती है –
मेरा जीवन ईश्वरीय इच्छा से पूर्णतः समरस हो!
दूसरा चरण
दूसरे चरण में हम एक ऐसी स्थिति की कल्पना करते हैं जहाॅं हमारा जीवन तो ईश्वरीय सत्ता के साथ पूर्ण समन्वय में व्यतीत हो रहा है, परंतु संपूर्ण सृष्टि की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हुई पड़ी है। क्या ऐसे जीवन का कोई प्रयोजन बचेगा? एक गंभीर विचार हमें हमारी मूल प्रार्थना को बदलने की प्रेरणा देगा –
सभी का जीवन ईश्वरीय इच्छा से पूर्णतः समरस हो!
अंतिम चरण
अंतिम चरण में हम इस निष्कर्ष पर आते हैं कि किसी भी काल और किसी भी स्थान में, ईश्वरीय सत्ता संपूर्ण सृष्टि के परम कल्याण के लिए ही प्रयत्नशील है। यह निष्कर्ष हमें दूसरे चरण में प्राप्त प्रार्थना को थोड़े अलग ढंग से लिखने में सहायता करता है, और यही है सर्वोत्तम प्रार्थना –
सबका मंगल हो!
तो, यदि आपको ईश्वर से एक ऐसी प्रार्थना करने का वरदान मिले, जिसका सफल होना निश्चित है, तो वह प्रार्थना क्या होगी?
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