मनुष्य एक विचित्र प्राणी है। हम अपने घरों को सुरक्षित रखने के लिए दीवारें खड़ी करते हैं और दरवाज़ों पर ताले लगाते हैं। अपनी राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा के लिए हम अथाह धन और संसाधन खर्च करते हैं। हमने अपने देशों में अवैध प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए जटिल और अक्सर तनाव व निराशा से भरने वाली आप्रवास प्रणालियाँ (immigration systems) भी बनाई हैं।
परंतु जब बात हमारे सबसे मूल्यवान साधन, अर्थात् हमारे मन की आती है, तो हम इसे हर प्रकार के विचार के आक्रमण के लिए पूर्ण रूप से असुरक्षित छोड़ देते हैं।
हमें एक सतर्क रक्षक नियुक्त करके इस बहुमूल्य संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए। इस रक्षक का नाम है ‘अवलोकन’, जिसका उत्तरदायित्व है कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से हर विचार के प्रयोजन की जाँच करना —
“क्या इस समय तुम्हारी आवश्यकता है?”
“क्या तुम मेरे भावों को शुद्ध करोगे, या उन्हें अशुद्धियों से मलिन करोगे?”
“क्या तुम केवल मेरे लाभ के विषय में सोच रहे हो, या दूसरों के मंगल की भावना भी रखते हो?”
“क्या तुम मेरे समय और ऊर्जा का सर्वोत्तम उपयोग करोगे?”
यदि कोई विचार इस पूछताछ के संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाता, तो उसे खारिज कर दें। अन्यथा, उसका अतिथि के रूप में स्वागत करें, लेकिन सुनिश्चित करें कि वह अपने निर्धारित समय से अधिक न ठहरे।
अब समय आ गया है कि हम अपनी सबसे महत्त्वपूर्ण सीमा को सुरक्षित करें।
यदि कोई विचार इस पूछताछ के संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाता, तो उसे खारिज कर दें। अन्यथा, उसे एक अतिथि के रूप में स्वीकार करें, लेकिन सुनिश्चित करें कि वह अपने निर्धारित समय से अधिक न ठहरे।
I love this. Thank you so much, Sri Guru and Seva team.