
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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दिल चाहता है हवाओं के साथ प्रियतम तक बह चलें दिल चाहता है पानियों सा हो कर उनके अनहद सागर में खो चलें दिल चाहता है लपटों सा उठ कर...
प्रेम के इस मेले में हर तरफ़ है सब कुछ भरा हुआ,मौन भी है ऐसा कि हर शब्द उसी में ठहरा हुआ!गीत बजते हैं अनहद धुन की तरह, कुछ इस कदरबजाने...
सफ़र-ए-रोशनी में मन की हर दहलीज़ को पार करना होता है दिल के दामन में आने के लिए!मंज़िल-ए-इश्क़ में किसी के प्रेम में पागल होना...
प्रेम तो बस होना है
हृदय को खोलना है और आपका होना है
सिखाने वाले तो तैयार हैं
उपकार भी है और मुद्रा स्मरण का औजार भी
कृपा भी है और बरसात भी
बस मैं अपनी छतरी छोड़ूं
औजारों में भी उपकार भरूं
चलूं उसी की और जो प्रेम हुऐ हैं
जो प्रेम हुऐ हैं