हम अक्सर ख़ुद को यकीन दिलाने की कोशिश करते हैं कि किसी दिन हम जीवन की ‘चेकलिस्ट’ को पूरा कर लेंगे और उसके बाद अपनी आध्यात्मिक यात्रा को प्राथमिकता देंगे।
यह चेकलिस्ट हमें सीमित लगती है, लेकिन सिर्फ़ इसलिए क्योंकि हम कभी इसमें छिपी सूक्ष्म शर्तें नहीं पढ़ते।
शिक्षा ग्रहण करने का अंत है, पर कुछ नया सीखना अंतहीन है।
दफ़्तर के समय का अंत है, पर दफ़्तर का काम अंतहीन है।
विवाह के उत्साह का अंत है, पर रिश्तों को निभाना अंतहीन है।
गर्भावस्था का अंत है, पर बच्चों की देख-भाल करना अंतहीन है।
घूमने-फिरने का अंत है, पर इच्छा अंतहीन है।
ये सभी सांसारिक प्रयास अंतहीन हैं; इसलिए नहीं कि इनका कोई अंत नहीं है, बल्कि इसलिए कि इनका ‘अंत’ हमेशा आगे खिसकता रहता है।
जीवन हमें एक दूसरे प्रकार का प्रयास करने का अवसर भी देता है। यह प्रयास भी अंतहीन होता है; इसलिए नहीं कि इसका कोई अंत नहीं है, बल्कि इसलिए कि यह किसी ‘अंत’ तक पहुँचने की प्रतीक्षा को ही मिटा देता है।
परम से मिलन की अभीप्सा अंतहीन है।
सत्य की जिज्ञासा बनाए रखना अंतहीन है।
प्रार्थना में समर्पण करना अंतहीन है।
ईश्वरीय-प्रवाह के साथ बहना अंतहीन है।
सेवा के माध्यम से लौटाना अंतहीन है।
जब जीवन का हर प्रयास अंतहीन है, तो क्यों न उस प्रयास को चुना जाए जो हर खोज का अंत कर दे, और अनंत की ओर ले जाए?
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