अध्यात्म का लक्ष्य मनुष्य के दुःख को दूर करना है। इससे यह प्रतीत हो सकता है कि अध्यात्म आपको हर तरह की पीड़ा से मुक्त कर देता है। पर ऐसा नहीं है।
आपके सभी सुख-दुःख मात्र क्षणिक व्याकुलताएं हैं। ये उस दवा (anaesthesia) की तरह कार्य करते हैं, जो आपको वास्तविक पीड़ा के प्रति बेहोश कर देती है। वही पीड़ा, जो हर तरह के दुःख का कारण है – अपने मूल स्रोत से दूर होने का दर्द।
अध्यात्म बेहोशी की दवा के असर को हटा देता है ताकि आप उस अनंत पीड़ा का सामना कर सकें, क्योंकि वही पीड़ा आपको मार्ग पर आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है। सुनिश्चित करें कि इस दर्द की अभिव्यक्ति आपके सांसारिक दुःखों जैसी न हो। यह निराशा या नीरसता के रूप में प्रकट नहीं हो। बल्कि, यह एक ऐसी शक्ति बने जो आपकी श्रद्धा और समर्पण को तीव्र करे, और साथ ही आपकी बिखरी हुई ऊर्जाओं को एक दिशा में केंद्रित करने का दृढ़ संकल्प भी दे।
यदि आपने इस सर्वश्रेष्ठ पीड़ा का एक अंश भी महसूस किया है तो अपने आप को धन्य समझें। इस पीड़ा की अग्नि में अपने अहम् को जलने दें। इस पवित्र अग्नि की राख से ही वह दिव्य हंस जन्म लेगा, जिसकी उड़ान आपको अपने स्त्रोत में वापस ले जाएगी।
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