अलार्म की पहली घंटी बजते ही धन्यवाद और शिकायत दोनो सावधान हो गए। तकिए के दोनों ओर वे अपने अपने कारणों की सूची के साथ तैयार थे, बस इस प्रतीक्षा में कि जागने की कगार पर खड़ा मन किसको चुनेगा!
शिकायत (आश्चर्य के साथ): “अरे धन्यवाद! तुम खिलखिलाते हुए फिर आ गए! हर सुबह मुझसे हारने के बाद भी! तुम्हारे पास आवश्यकता से अधिक समय है? या स्वाभिमान का अभाव?”
धन्यवाद (प्रेम से): “प्रिय शिकायत! ऐसी तो कोई बात नही, किंतु मैं आया हूँ क्योंकि मेरे कारणों की सूची तुम्हारे कारणों से कई अधिक बड़ी है, और यह तो तुम भी जानते हो।”
शिकायत (ठहाका लगाते): “भोले धन्यवाद! पर क्या तुम मनुष्य की मूर्खता नहीं जानते? जब उसकी इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं तो वह शिकायत करता है, लेकिन जो आशीर्वाद उसके पास पहले से ही हैं उनके प्रति धन्यवाद से नहीं भरता। वह कभी-कभी होने वाली बीमारियों के बारे में शिकायत करता है, लेकिन स्वास्थ्य के अमूल्य उपहार के लिए कभी आभार व्यक्त नहीं करता! और मनुष्य की यही प्रवृत्ति मुझे और मेरे मित्रों, ईर्ष्या और दुःख, को सुरक्षित रखती है!”
धन्यवाद (शांति से): “भली भांति जानता हूँ, किंतु मैं निराश नहीं होता क्योंकि मुझे विश्वास है कि मनुष्य एक बार जब मेरे कारणों की लंबी सूची देखेगा तो अवश्य शिकायत के स्थान पर धन्यवाद, और दुःख के स्थान पर प्रसन्नता चुनेगा।”
और तभी अलार्म की दूसरी घंटी बजी। क्या मन शिकायत की जानी-पहचानी नकारात्मकता के आगे झुक जाएगा, या फिर वह धन्यवाद के अपरिचित पर उत्साहवर्धक मार्ग को अपनाएगा?
ईश्वर इस चुनाव की शक्ति हमें ही सौंपते हैं। हर एक सुबह।
So True…. Our Sri Guru ji has told this many times in satsangs. We should fill ourselves with Gratitude for every thing in daily life instead of complaints. Gratitude is an emotion which fills you with positivity and you always live in bliss.
प्रस्तुती बहुत आकर्षक है। धन्यवाद