ईश्वर हमारे लिए एक आदर्श सृष्टि बनाना चाहते थे। एक ऐसी सृष्टि जिसमें अनेक बोध छुपे हों, जिनके माध्यम से हमें अपने शाश्वत घर लौटने का मार्ग सरलता से मिल सके।
इसी हेतु से ईश्वर ने तारे बनाए, यह सिखाने कि घोर अंधकारमय समय में भी सत्य टिम-टिमाता रहता है, और अंततः सूर्य की तरह उज्ज्वल हो ही जाता है।
ईश्वर ने बादल बनाए, यह सिखाने कि जब हृदय पर किसी भी बात का भार अधिक हो जाए, तो उसका परित्याग कर देना चाहिए।
ईश्वर ने समुद्र की रचना की, यह सिखाने कि जीवन में सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव, शांति और अस्तव्यस्तता, और ऐसे अनेक प्रकार के द्वंद्व शामिल हैं।
ईश्वर ने वृक्ष बनाए, यह सिखाने कि विकास के लिए धैर्य और श्रद्धा अनिवार्य हैं।
ईश्वर ने वायु का सर्जन किया, यह सिखाने कि हम अपने उच्चतम उद्देश्य के साथ संरेखित रहने के लिए अपनी दिशा और गति का समायोजन कर सकते हैं।
ईश्वर ने पुष्पों की रचना की, यह सिखाने कि इस संसार में सुंदर से सुंदर व्यक्ति-वस्तु-परिस्थिति भी अनित्य है।
लेकिन अफसोस, हम अपने ही मन और उसकी व्यर्थ की कामनाओं में इतने व्यस्त हो गए कि इन सूक्ष्म लेकिन स्पष्ट संकेतों को समझ नहीं पाए। तो ईश्वर ने इन सभी (और अनगिनत अन्य) गुप्त बोध से सुसज्जित एक मनुष्य का सर्जन किया। एक आदर्श मनुष्य।
इस आदर्श मनुष्य की खोज अर्थात् ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज करना।
उसकी पूर्णता के प्रति समर्पण करना अर्थात् अपनी पूर्णता का आह्वान करना।
उसकी आज्ञा का पालन करना अर्थात् सृष्टा की ओर ले जाने वाले मार्ग पर अग्रसर होना।
खोज, समर्पण, आज्ञा-पालन। क्या मार्ग इससे अधिक सरल हो सकता है?
“दूसरा कुछ मत खोज, मात्र एक सत्पुरुषको खोजकर उसके चरणकमल में सर्वभाव अर्पण करके प्रवृत्ति किये जा। फिर यदि मोक्ष न मिले तो मुझसे लेना।”
– श्रीमद् राजचन्द्र जी (वचनामृत 76)
सच में मार्ग इससे सरल नहीं हो सकता है; प्रभु (गुरु) ने खोज लिया, हमें उनके प्रति का समर्पण भी पूरा है, उनकी आज्ञा उठाने में बहुत उत्साह भी है और पूरा भरोसा भी है कि अपने घर की ओर लोटना अब अवश्य ही है…
अब तो केवल उनके प्रति की धन्यता के भाव ही उमड़ते है। हे प्रभु, अनंत अनंत शुक्राना🙏🙏🙏🙏🙏
हम अपने शरीर के सबधं मे बहुत कम जानते है; कारण यह है कि मन को उतना एकाग्र नही कर सकते जिससे हम शरीर के भीतर की अति सुक्ष्म गतिविधियों को समझ सके। परन्तु अब ये सम्भव है क्योंकि हमे अपने प्यारे सद्गुरु मिल गए है जो हमारे सचे मार्ग दर्शक है जय कृपालु आहो उपकार…