
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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सुनी थी भक्ति कई दफ़ा पहले अटपटी लगती थी कुछ ये हमें पर प्रेम जब से तुम से हुआ सब कुछ अब तुम में ही दिखा एहसास अपने तुम दे जाते हो और...
“रचना (Creation) एक भ्रमित करने वाला शब्द है; इस दुनिया में कोई भी नई रचना नहीं होती, सब कुछ केवल अभिव्यक्त (manifest) होता है।”
जीवन की एक विचित्र विडंबना यह है कि हम अक्सर वस्तुओं को उनकी अनुपस्थिति में ही पहचानते हैं। भोजन में नमक, घर में बिजली, शरीर का...
क्या खूब इतनी खूबसूरती से इतने कम शब्दों में कह डाला! धन्यवाद साहिब जी । ♥️♥️♥️
बार बार मन भटकता रहता है, और श्री गुरु आप सही में हाथ पकड़कर सही रास्ते पर अग्रसर केआर लेते है; व्ह मेरा निजी अनुभव है। 🙏 अहो उपकार!! अहो उपकार!!🙏🙏 शत-शत नमन श्री गुरु🙏🙏🙏