“हम जो कुछ करना चाहते हैं, उसके लिए कभी पर्याप्त समय नहीं मिलता”, यह एक सामान्य संघर्ष है। समय जैसे कहीं उड़ जाता है, है न?
नहीं। समय पीछा करता है।
किसका पीछा करता है? हमारे मन का।
दैनिक जीवन में हम मन के मामलों में इतने फँसे हुए रहते हैं कि यह भूल जाते हैं कि समय उन सब कार्यों का अनुसरण करता जिन्हें हमारा मन महत्व देता है। हम जितने अधिक कार्यों को महत्वपूर्ण समझते हैं, हमारे पास उतना ही कम समय बचता है।
हालाँकि, जब हमारा हृदय आगे बढ़कर हमें किसी ऐसे कार्य में लीन कर देता है जो हमें विशेष रूप से प्रिय हो, तो हम समय का सारा बोध खो देते हैं। इसे ‘फ्लो स्टेट’ (flow state) के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी अवस्था जिसमें हम हृदय से जीते हैं और मन से परे चले जाते हैं। इस फ्लो स्टेट के कारण ही किसी गहन कार्य के दौरान, या उससे भी बेहतर, एक सद्गुरु की उपस्थिति में ऐसा लगता है जैसे समय कहीं लुप्त हो गया। और यही वो पल होते हैं जब हम सबसे अच्छा महसूस करते हैं। मन से परे, समय से भी परे!
समय उड़ता नहीं है। आप या तो इसे खो देते हैं क्योंकि आपका मन बहुत सारे कार्यों में विभाजित रहता है, या इसके पार चले जाते हैं, जब आपका हृदय आपको मन के जाल से मुक्त कर देता है।
Very true spark✨
Thankyou Sriguru ❤️
यह श्री गुरु जी आपके संपर्क में ही आ कर अनुभव बनता है लेकिन इस अनुभव क्या खूब कहा है। अथाह शुक्राने।