
प्रबुद्ध जीवन हेतु बोध
श्री गुरु और SRM टीम द्वारा
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सद्गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं हैं – वे तो प्रियतम का वादा हैं, मनुष्य के हृदय तक पहुँचने का वादा। जब भी कोई सद्गुरु इस धरती पर विचरते...
हमें परिचित चीज़ों की बहुत जल्द आदत पड़ जाती है, पर यह आदत एक दोधारी तलवार की तरह है।इस तलवार की एक धार हममें जिज्ञासा, प्रेरणा और...
रिश्ते यूँ ही ख़त्म नहीं होते। हम उन्हें ख़त्म कर देते हैं – ख़ामोशी से।यह ख़ामोशी विनाश का इतना घातक हथियार है कि यह 'प्रियतम' के साथ...
सही में गुरु आज्ञा सजगता की कमी होती है तब ऊर्जा निम्न स्तर पर ही रहती है जैसे मन खेदभाव से भरा रहता है लेकिन जब गुरु आज्ञा पूरी सजगता में पालन होता है तो ऊर्जा का स्तर काफी हद तक ऊंचा रहता है मन धन्यवाद के भाव से भरा रहता है।
कितनी आसान भाषा मे कितना बड़ा बोध दिया है। आपका खूब खूब आभार 🙏🏻🙏🏻