इस दुनिया ने कई प्रेम कहानियाँ देखी हैं। लेकिन उनमें से कुछ चंद प्रेम कहानियाँ ही अमर हो पाई हैं। और उन सभी में एक समान विशेषता उभर कर आती है—अनगिनत बाधाओं के बीच दो प्रेमियों का मिलना। कई लोगों का मानना है कि वही प्रेम कहानियाँ प्रेम की सर्वोच्च पूर्णता को प्राप्त करती हैं जिनमें दो प्रेमी बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार करते हैं और सभी बाधाओं के बावजूद मिल जाते हैं।
हम में से हर कोई एक ऐसी प्रेम कहानी जी रहा है जिसमें उस पूर्णता तक पहुँचने की क्षमता है। नहीं, किसी दूसरे मनुष्य के प्रति का प्रेम नहीं, बल्कि प्रेम के प्रति का प्रेम… उस प्रियतम के प्रति का प्रेम जो इस सृष्टि को अस्तित्व में लाने के लिए स्वयं प्रेम बन जाता है। चाहे हम जानें या न जानें, चाहे हम मानें या न मानें, यही वह प्रेम है जिसकी हम सभी खोज कर रहे हैं।
इस दिव्य प्रेम कहानी में भी अनगिनत बाधाएँ हैं, जो या तो बाह्य व्यक्तियों, वस्तुओं और परिस्थितियों के रूप में प्रकट होती हैं, या हमारी ही अपनी मान्यताओं और संस्कारों के रूप में। कुछ बाधाएँ हमें चोट पहुँचाती हैं, कुछ हमें बुरी तरह गिरा देती हैं। परंतु सबसे गहन नुकसान उन बाधाओं से होता है जो हमें विचलित कर देती हैं। आप जिसे खोज रहे थे उसे ही भूल जाना, इससे बड़ी बाधा और क्या हो सकती है?
हमारा सर्वश्रेष्ठ सौभाग्य है कि प्रियतम हमें कभी नहीं भूलता; हर क्षेत्र और काल में एक सद्गुरु के रूप में हमें यह स्मरण दिलाने का प्रयत्न करता है कि वो हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। और तब तक करता रहेगा जब तक हम बाकी सब भुलाकर एक उसी की खोज में मग्न नहीं हो जाते।
श्री सद्गुरू चरणों में अनन्य भक्ति भाव से सादर नमन। यह पंथ नहीं आसान पढ़ने के बाद हृदय में ऐसी प्रेम की तरंग उठी मैंने पहली बार अपने हृदय की धरकण को गहराई से अनुभव किया है। मैं स्वयं को अभिव्यक्त कर पाने में असमर्थ हूं। शब्द नहीं हैं मेरे पास। अहो उपकार! श्री गुरु अहो उपकार!
जय कृपालु प्रभुजी।
बाधाएं तो जीवन में बहुत आती है, किन्तु उन चुनौतियों को प्रेमपूर्वक और समता भाव से स्वीकार करना ही प्रभु मिलन कराता है। इस दौड़ती-भागती दुनिया में हम भूल जाते हैं कि हमारा जीवन प्रेममय होकर सर्वोत्तम मार्ग की ओर बढ़ने के लिए है। श्री गुरुजी, आपने मुझे भटके हुए मार्ग से निकालकर प्रीतम के मार्ग पर चलने की राह दिखाई। मेरे जीवन में जो बदलाव आए हैं, उसके लिए मैं आभारी हूँ।
गलतियाँ होती हैं, लेकिन आपके सानिध्य में मैं उन पर नियंत्रण करना सीख रहा हूँ। कृपया मुझे कभी न छोड़ें। मैं जानता हूँ कि आप मुझे प्रीतम तक पहुँचाने का संकल्प पूरा करेंगे।
जय कृपालु प्रभुजी।
JaI Krupadu Pr. Aho upkar SrI Guru ji…
The pious Love gives us the fuel to keep our fire to love our beloved but we keep forgetting our goal in worldly rountine life.
We all our blessed souls to have our Sadguru, Sri Guruji for giving us the wakeup calls that our existence is to achieve the Supreme Love ❤ and despite of various hurdles, we should not forget our goal even for a moment.