नहीं, पर यह सहायक अवश्य हो सकती है।
कोई साधारण पीड़ा नहीं, बल्कि वह पीड़ा जो आपकी आत्मा को अनावृत कर दे। वह पीड़ा जो आपको निराशा की गहराइयों तक ले जाए। वह पीड़ा जो अन्य सभी दुखों को निगल ले। वह पीड़ा जो वापस सांसारिक जीवन की ओर ले जाने वाले हर द्वार बंद कर दे। वह पीड़ा जो उन अनेक इच्छाओं को मिटा दे जो आपकी सबसे गहन और मौलिक इच्छा को ढके हुए थीं। वह पीड़ा जिसमें आप सब कुछ भूल जाना चाहें, लेकिन जो आपको वह एक बात स्मरण करा दे जिसे आप सदा से भूले हुए थे।
जब आप इस गर्त के अंतिम तल पर पहुँचते हैं, तब आपकी मुलाक़ात एक एहसास से होती है — जिस प्रकार आपको जन्म देते हुए आपकी माँ को असहनीय पीड़ा से गुज़रना पड़ा था, उसी प्रकार आपकी पीड़ा एक नए जीवन को जन्म दे रही है।
एक ऐसा जीवन जहाँ आप अपने नए नयन खोलकर इस जगत का सौंदर्य और भीतर के जगत की दिव्यता निहारते हैं। यहाँ आप पीड़ा से भागते नहीं, बल्कि उसके साथ मुस्कुराते हैं, क्योंकि आप जानते हैं कि वास्तविक पीड़ा केवल एक है। और जो हृदय इस पीड़ा के प्रति बेसुध हो चुके हैं, उनमें इसे फिर से जगाने के लिए आप अपना जीवन समर्पित कर देते हैं; क्योंकि इतनी मधुर वेदना अपने तक रखने के लिए कभी थी ही नहीं।
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